अरब देश भी पहले आर्य थे, और महादेव को मानते थे... - सबूत

4 months ago
Suresh Chiplunkar
हज़रत मोहम्मद के चाचा, उमर बिन-ए-हश्शाम (जिन्हें अबू हाकम अर्थात ज्ञान का पिता के नाम से भी जाना जाता है) एक प्रसिद्ध अरबी कवि थे। इन्होंने भगवान शिव की स्तुती में एक अरबी कविता लिखी है, जिसे सायर-अल-ओकुल में भी शामिल किया गया है।  इस अरबी कविता को नई दिल्ली के लक्ष्मीनारायण मन्दिर के पीछे स्थित बगीचे में अग्नि मण्डप के एक शिलालेख पर देखा जा सकता है… इस अरबी कविता का हिन्दी अनुवाद इस प्रकार है -- 1) वह मनुष्य जिसने अपना जीवन काम, क्रोध, पाप और अधर्म में बिताया हो, अपने जीवन को नष्ट किया हो… 2) यदि अन्त में उसे पश्चाताप हो और वह भलाई की ओर लौटना चाहे तो क्या उसका कल्याण हो सकता है?… 3) एक बार भी वह सच्चे हृदय से महादेव की पूजा करे तो धर्म के मार्ग में उच्च स्तर को पा सकता है… 4) हे प्रभु, मेरा समस्त जीवन लेकर मुझे सिर्फ़ एक दिन के लिए भारत में निवास दे दो, क्योंकि उस भूमि पर पहुँच...........

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