असम में "लिव-इन" की ब्रिटिशकालीन कुरीति RSS ने कैसे खत्म की.... जानिये

7 months ago
desiCNN
आज सत्यप्रकाश मंगल को उस महिला का नाम याद नहीं है, लेकिन घटना पूरी तरह से याद है। लगभग तीन साल बाद भी वे उसके बारे में बताते हुए पूरी तरह से रोमांचित हो उठते हैं। उनकी आंखों में चमक आ जाती है और वे उस दु:खद घटना में छिपी सुखद अनुभूति को छिपा नहीं पाते। वे बताते हैं, ''असम के ही एक जिले की घटना है। हमारे कार्यकर्ताओं को सूचना मिली कि 70 साल की एक बुजुर्ग महिला के पति का देहांत हो गया है। वे लोग सांत्वना देने उनके घर चले गए। उन लोगों ने उस बुजुर्ग महिला को सांत्वना दी तो उसे कुछ अटपटा-सा लगा। वह दु:खी तो थी लेकिन उसके चेहरे पर एक प्रकार का संतोष भी था। जब कार्यकर्ता दु:ख प्रकट करने लगे तो उसने रोकते हुए कहा, ''बेटा जिनको जाना था वे चले गए। मर तो हम पहले भी रहे थे लेकिन वह मौत मनुष्यों की तरह नहीं थी। हम मरते भी थे तो भेड़-बकरियों की तरह। लेकिन आज मुझे इस बात का संतोष है कि मैं उनके स...........

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