आरक्षण नीति और उसके लाभान्वितों पर एक श्वेत पत्र आवश्यक .

1 week ago
desiCNN
(लेखक :- सुरेन्द्र कुमार)अक्सर चुनाव का समय आते ही प्रमुख राजनेताओं में आंबेडकर को भारत के सबसे बड़े निर्माताओं में से एक बताने की होड़ लग जाती है। वे टीवी कैमरों के सामने जमीन पर बैठकर और दलित बस्तियों में खाना खाकर दलितों के प्रति अपने प्यार का प्रदर्शन करते हैं। लेकिन इससे अलग अस्पृश्यता अब भी जीवित है और ऊना में दलित युवाओं की बेरहमी से पिटाई जैसे बर्बर उदाहरण हजारों गांवों में देखने को मिलते हैं। वर्ष 2017 में एनसीआरबी द्वारा आधिकारिक रूप से दलितों के खिलाफ हमले के 47,000 से ज्यादा मामले दर्ज किए गए, जिनमें से अकेले उत्तर में 11,440 मामले दर्ज किए गए। पर ये घटनाएं हमें शर्मिंदा नहीं करती हैं! जानबूझकर नियमित रूप से सरकारी सेवाओं में वितरण की कमी, अयोग्यता और विफलता का दोष आरक्षण नीति पर मढ़ा जाता है। क्या यह इन मुद्दों पर ईमानदार और निष्पक्ष बहस का समय नहीं है?आजादी ...........

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