करतारपुर कॉरीडोर के बहाने, पाकिस्तान स्थित गुरुद्वारों की जानकारी

8 months ago
desiCNN
‘गुरुद्वारा जन्म स्थान’ को ‘गुरुद्वारा ननकाना साहिब’ भी कहा जाता है। इस जगह का नाम सिखों के पहले गुरू, गुरू नानक जी के जन्म के बाद पडा। आज के समय में ये जगह ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व रखती है। इस शहर की जनसंख्या की बात करें तो उनकी तादाद ७० हजार के करीब बताई जाती है। ये पाकिस्तानी पंजाब के ‘ननकाना साहिब’ शहर में है। इसका पुराना नाम ‘राय-भोई-दी-तलवंडी’ था। यहां पर विश्व भर के सिख आते हैं। ‘गुरुद्वारा पंजा साहिब’ पाकिस्तान के हसन अदबाल शहर में है। हसन अदबाल, पाकिस्तानी पंजाब में है। इस गुरुद्वारे का महत्व गुरू नानक जी के पंजे के निशान के लिए है। गुरु नानक देव जी अपनी एक यात्रा के दौरान यहां रुके थे। जिस दौरान एक बार लडाई हुई, जिसमें उन्होंने अपने हाथ से चट्टान को रोका था। तब उनके हाथ की छाप पत्थर पर पड गई थी। ‘गुरुद्वारा रोरी साहिब’ पाकिस्तान के एमिनाबाद में है। ...........

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