काशी शास्त्रार्थ स्मृति दिवस विशेष :- मूर्तिपूजा और महर्षि दयानंद

3 months ago
desiCNN
महर्षि दयानन्द को सत्यार्थप्रकाश लिखने की आवश्यकता इस लिये पड़ी थी कि उनके समय में वेद एवं वैदिक शिक्षाओं का लोप हो चुका था और यदि कहीं कुछ बचा हुआ था तो वह भी लुप्त होता जा रहा था। वैदिक धर्म एवं संस्कृति की रक्षा के साथ सत्य की प्रतिष्ठा और असत्य के त्याग करने व कराने के लिये ऋषि दयानन्द ने एक अपूर्व ग्रन्थ सत्यार्थप्रकाश ग्रन्थ की रचना की। जिस प्रकार से सूर्य के अस्त होने पर अन्धकार हो जाता है उसी प्रकार से वेदज्ञान रूपी सूर्य के अस्त व विलुप्त हो जाने से देश देशान्तर में अज्ञान, अन्धविश्वास एवं मिथ्या परम्पराओं का आरम्भ हुआ था जो समय के साथ वृद्धि को प्राप्त हो रहा था। देश की दासता वा पराधीनता के कारण भी वेदों के लुप्त होने तथा अन्धविश्वासों के अस्तित्व में आने व उनके हमारे जीवन का अंग बन जाने के कारण ही उत्पन्न हुए थे। सृष्टि की उत्पत्ति से लेकर महाभारत क...........

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