"केवल" क़ानून बनाना इलाज नहीं :- संस्कार और मनोवृत्ति बदलना होगी

4 months ago
desiCNN
उन्नाव और कठुआ रेप मामलों में देशव्यापी राजनीतिक एवं जन-असंतोष को भांपकर सरकार ने 12 साल तक की बच्चियों से दुष्कर्म के दोषियों को फांसी की सजा के लिए अध्यादेश जारी कर दिया। प्रश्न है कि क्या मौत की सजा का प्रावधान करने मात्र से इन दुष्कर्माें एवं नारी अत्याचारों पर नियंत्रण पाया जा सकता है? कुछ महीने पहले ही सुप्रीम कोर्ट में पाॅक्सो मामलों में सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने कहा था कि मौत की सजा से अपराधों का समाधान नहीं हो सकता है। कानूनों को कठोर करने का लाभ तभी है जब उन पर समय पर अमल किया जाए। अन्यथा कोरे कानून बनाने का क्या लाभ है?देश में जितने वास्तविक बलात्कार एवं बाल-दुष्कर्म के मामले दर्ज नहीं होते, उससे अधिक फर्जी मामलें दर्ज हो रहे हैं, और इन सख्त कानूनों की आड में लोग एक-दूसरे से बदला ले रहे हैं या अनुचित धन कमा रहे हैं और सामाजिक सोच को दूषित कर रहे हैं...........

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