क्या असम का NRC भाजपा का नया सिरदर्द बनेगा??

2 weeks ago
desiCNN
अब तक असम तक सीमित नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटिजन्स (एनआरसी) को 2019 के घोषणापत्र में राष्ट्रीय स्तर पर लागू करने के भाजपा के दावे के बाद यह चुनावी बहस का केंद्र बिंदु बन गया था। अब जबकि असम में इसे प्रकाशित करने की अवधि पूरी होने वाली है, इसको लेकर भारी विवाद पैदा हो गया है।एनआरसी का उद्देश्य देश के वास्तविक नागरिकों को दर्ज करना और अवैध प्रवासियों की शिनाख्त करना है। असम में ऐसा पहली बार 1951 में नेहरू सरकार द्वारा असम के तत्कालीन मुख्यमंत्री गोपीनाथ बारदोलोई को शांत करने के लिए किया गया था, जो विभाजन के बाद बड़ी संख्या में पूर्वी पाकिस्तान से भागकर आए बंगाली हिंदू शरणार्थियों को असम में बसाए जाने के खिलाफ थे। 1980 के दशक में वहां के कट्टर क्षेत्रीय समूहों द्वारा एनआरसी को अद्यतन करने की लगातार मांग की जाती रही। असम आंदोलन को समाप्त करने के लिए राजीव गांधी सरकार द्वारा 1985 ...........

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