गर्भपात का धार्मिक परिप्रेक्ष्य :- भाग २ (जन्म देना महान कार्य)

2 months ago
desiCNN
(लेखक : नितिन श्रीधर) श्रृंखला के भाग-1 में, गर्भपात के विषय को धर्मिक दृष्टिकोण से देखते हुए, हमने प्रश्न किया था कि एक जीव कौन है? हमने यह भी देखा कि कैसे धर्मिक परंपरा में, एक जीव को केवल भौतिक इकाई के रूप में ही नहीं माना जाता है। बल्कि, जीव को एक “जटिल बहुस्तरीय इकाई” के रूप में पहचाना जाता है, जो एक ओर ब्रह्म, परम दिव्य सत्य का प्रतिबिंब है तो दूसरी ओर त्रि-शरीर और पंच कोष से संपन्न है, जिसके माध्यम से जीव बाहरी ब्रह्मांड के साथ संवाद स्थापित करता है।“श्रृंखला के इस भाग में, अब हम मानव जीवन से जुड़े महत्वों पर ध्यान देंगे और यह भी समझेंगे कि एक बच्चे को जन्म देना धार्मिक परंपरा में क्यों एक पुण्य कर्म माना जाता है।मानव जीवन का महत्व आदिगुरु शंकराचार्य ने अपने अभूतपूर्व कार्य “विवेकचूडामणि” के दूसरे श्लोक में कहा है कि सभी जीवित प्राणियों में, मानव के रूप में ज...........

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