तकनीक, कैरियर, मशीनों और पुरुषों ने महिलाओं से उनकी विशेषज्ञता छीन ली

2 months ago
desiCNN
हमारी पीढ़ी की स्त्रियां जब पलटकर देखती हैं तो उन्हें अपने गांवोंं, कस्बों और नगरों में ऐसी बेशुमार स्त्रियां नजर आती हैं जिनके पास काम ही काम थे। जैसे, गाय-भैैंस का दूध दुहने से लेकर उनके दाना, पानी, नहलाने का बंदोबस्त करना, बदलते मौसम की मार से उन्हें बचाना, गोबर से उपले थापना, उसके साथ पीली मिट्टी मिलाकर कच्चे घरों की लिपाई-पुताई करना, संयुक्त परिवारों का खाना पकाना, कपड़े धोना, घर की साफ-सफई करना। इसी तरह मौसम के हिसाब से थोक में दाल, चावल, मसाले खरीदकर उन्हें सुखाना, साफ करना, चक्की पर पीसना, दालों, मसालों में कीड़े न लगें, इसके लिए उन पर हल्के हाथ से तेल लगाना, फिर उन्हें ठंडा करके कनस्तरों, डब्बों में भरना।महिलाओं के पास थे काम ही कामइसके अलावा मौसमी अचार, पापड़, बड़ियां बनाना, स्वेटर बुनना, कपड़े सिलना और पल-पल आते तीज-त्योहारों से जुड़े खान-पान तैयार करना, घर में वक्त-ब...........

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