दक्षिणपंथ-वामपंथ के झगड़े में देश के महापुरुषों का भी बँटवारा??

1 month ago
desiCNN
(प्रभुनाथ शुक्ल)संविधान के मूल में अभिव्यक्ति की आजादी को पूरी तवज्जों दी गई है। सवाल तब उठता है जब विचारों की आजादी हाथ में पत्थर उठा ले। बेगुनाह लोगों की माब लिंचिंग करे। बसों, रेलवे स्टेशनों, सार्वजरिक संपत्ति को आग के हवाले कर दे। बदले में सरकारें ऐसे लोगों के खिलाफ पोस्टर जारी कर उनकी शिनाख्त करने की अपील करें। उनके घरों पर सरकारी नोटिस चस्पा हो जाए। यूपी जैसे राज्य में पुलिस दो-चार नहीं दस-दस हजार लोगों को आरोपी बना डाले। सरकारी संपत्ति क्षतिपूर्ति की नोटिस तामिल कराई जाय। हिंसक प्रदर्शन में लोगों को जेलों में ठूंस दिया जाए। यह कैसी आजादी है ? हम किस तरह की आजादी चाहते हैं। हमारा संविधान क्या ऐसी अभिव्यक्ति की आजादी देता है ? दक्षिण और वामपंथ की लड़ाई में देश जल रहा है। सेक्युलरवाद के नाम पर नई परिभाषा गढ़ी जा रही है। विचारधाराओं के हिंसक धड़े तैयार हो ग...........

For More Download the App