"दया" के महासागर और "मानवता" के मसीहा - एम. करुणानिधि (भाग-2) … Karunanidhi, Secularism, Human Rights, Terrorism (2)

10 years ago
Super User
(भाग-1 से आगे जारी…) 10 जून 2006 को केरल के मुख्यमंत्री अच्युतानन्दन खुद करुणानिधि से मिलने चेन्नै पहुँचे और अब्दुल नासिर मदनी की सुरक्षित रिहाई की गुहार लगाई। हालांकि "दया के सागर" ने तत्काल उसे रिहा करने से मना कर दिया (शायद अन्नादुरै का जन्मदिन दूर होगा), लेकिन महानता की पराकाष्ठा को पार करते हुए करुणानिधि ने जेल में ही मदनी के लिये आयुर्वेदिक मसाज और चिकित्सा की व्यवस्था करवा दी (क्या कहा? आपको कसाब का AC और अफ़ज़ल का चिकन बिरयानी याद आ गया? मेरी गलती नहीं है)। अप्रैल 2007 में कोयम्बटूर बम विस्फ़ोटों की सुनवाई पूरी हुई जिसमें 1300 गवाहों ने बयान दिये। 1 अगस्त 2007 को मुकदमे का निर्णय आया और जैसा कि अपेक्षित था अब्दुल नासेर मदनी को सबूतों के अभाव में छोड़ दिया गया, जिसका केरल में एक हीरो की तरह स्वागत हुआ, बाशा, अंसारी तथा अन्य को सजा हुई, जिन्हें अब "दया के सागर" ने अन्नदुरै के जन्मदि...........

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