धारा 370 :- स्वयंसेवक की बाजी, असंभव को संभव बनाया

2 weeks ago
desiCNN
इच्छाशक्ति और अनिर्णय के बीच बहुत ज्यादा दूरी नहीं होती। राजनीति में तो कई बार यह बात दिलचस्प शक्ल ले लेती है। कुछ चीजें इच्छापूर्वक अनिर्णीत छोड़ दी जाती हैं या अनिच्छापूर्वक निर्णीत हो जाती हैं। इसमें बहुत-सी आसानियों, समीकरणों और दुश्वारियों का हिसाब रखा जाता है। यदि अनिर्णय के माहिर केंद्र में हों, तो एक उपयोगी धुंध बना ली जाती है। हो जाए या न हो, दोस्तों और दुश्मनों - दोनों के बीच सहज, धुंधला संबंध जीवित रहता है और सारे जोखिम टाल दिए जाते हैं। जनप्रिय बने रहने के, कई नुस्खों में से एक यह भी है। एक दूसरा रास्ता जोखिम लेने का है। इसके लिए आर या पार का ईमानदार साहस एकत्र करना होता है और भविष्य के खतरों का भय भी लिख लेना होता है।यह पहली बार है, जब बहुत से यथास्थितिवादी सदमे में आ गए हैं। क्योंकि खुद नरेंद्र मोदी के पार्टी के सदस्य जो अपनी आंखों में 370 जाने का सप...........

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