पश्चिमी-वामपंथी दखल :- भारतीय परिवार परंपरा पर आघात...

2 months ago
रवि शंकर
परिवार भारत का वैशिष्ट्य माना जाता है। यह इसलिए कि परिवार के भाव का जो विस्तार भारतभूमि में हुआ, वह अन्यत्र कहीं और नहीं हुआ, बल्कि हुआ यह कि जो परिवार भारत में एक भाव था और जिसका विस्तार अपने कुटुम्ब से बढ़ कर संपूर्ण पृथ्वी तक हुआ था, उस परिवार भाव को अन्यत्र विशेषकर यूरोप में एक संस्था माना और बना दिया गया और इस प्रकार वह एक व्यक्तिगत सत्ता का प्रतीक बनकर रह गया। भारत में परिवार कोई संस्था नहीं है और इसलिए माता-पिता कोई सत्ता नहीं है। मातृत्व और पितृत्व एक भाव है। इस भाव से ही परिवार का निर्माण होता है और इस भाव के कारण ही मनुष्य पशुओं से ऊपर उठता है। परिवार के बनते ही स्त्री स्त्री मात्र नहीं रह जाती और पुरुष पुरुष मात्र नहीं रह जाता। स्त्री माता, बहिन, बेटी, मामी, मौसी, चाची, फुआ, दादी, नानी आदि बन जाती है और पुरुष पिता, भाई, बेटा, मामा, मौसा, चाचा, फूफा, दादा, नाना आदि ...........

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