प्राचीन भारतीय ग्रंथों में विमान तकनीक और डेनियल सेल (भाग-२)

3 months ago
desiCNN
अमरांगण-सूत्रधार में 113 उपखंडों में इन चारों विमान प्रकारों के बारे में पायलट ट्रेनिंग, विमान की उड़ान का मार्ग तथा इन विशाल यंत्रों के भिन्न-भिन्न भागों का विवरण आदि बारीक से बारीक जानकारी दी गई है. भीषण तापमान सहन कर सकने वाली सोलह प्रकार की धातुओं के बारे में भी इसमें बताया गया है, जिसे चाँदी के साथ सही अनुपात में “रस” मिलाकर बनाया जाता है (इस “रस” शब्द के बारे में किसी को पता नहीं है कि आखिर यह रस क्या है? कहाँ मिलता है या कैसे बनाया जाता है). ग्रन्थ में इन धातुओं का नाम ऊष्णन्भरा, ऊश्नप्पा, राज्मालात्रित जैसे कठिन नाम हैं, जिनका अंग्रेजी में अनुवाद अथवा इन शब्दों के अर्थ अभी तक किसी को समझ में नहीं आए हैं. पश्चिम प्रेरित जो कथित बुद्धिजीवी बिना सोचे-समझे भारतीय संस्कृति एवं ग्रंथों की आलोचना करते एवं मजाक उड़ाते हैं, उन्होंने कभी भी इसका जवाब देने अथवा खोजने की को...........

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