बंगाल के वाम एवं ममता पोषित गुण्डा-तंत्र को किसने भेद दिया??

3 months ago
desiCNN
एक बंगाली कहावत है “सोरसे मोद्हे भूत , तहाले भूत केमोन भाग्बे”... यानि सरसों की जड़ में सरसों का भूत है , तो भूत भागेगा कैसे ? यानि जब समस्या के मूल में ही समस्या है तो समस्या जायेगी कैसे? इसे हम इस प्रकार भी कह सकतें हैं कि पश्चिम बंगाल में वामपंथ की समस्या के जड़ में ममता बनर्जी की तृण मूल नामक समस्या पहुँच गई है. अब समस्या के मूल में एक और समस्या है जिसे हल करना है. यदि देश भर में भाजपा की विजय नरेंद्र मोदी और अमित शाह का करिश्माई अध्याय है तो इस अध्याय के इस विशिष्ट बंगाली संस्करण या दृश्य के विशिष्ट दिग्दर्शक के रूप हम एक ही व्यक्ति का नाम ले सकते है, और वह नाम है, कैलाश विजयवर्गीय!! अमित शाह ने इस बंगाली दृश्य में भरपूर हिंसा, मारपीट, हमले, मुठभेड़ और रक्त से रंगे हुए तृण मूल के अभियान का पूर्वाभास कर लिया था. भाजपा के नई शैली के अध्यक्ष अमित शाह को तलाश थी किसी ऐसे व्...........

For More Download the App