बलिदान, पराक्रम और परमार्थ की अनूठी परंपरा.. :- खालसा पंथ

6 months ago
desiCNN
जब राष्ट्राकाश गहन अंधकार से आच्छादित था, विदेशी आक्रांताओं एवं आतताइयों द्वारा निरंतर पदाक्रांत किए जाने के कारण संस्कृति-सूर्य का सनातन प्रकाश कुछ मद्धिम-सा हो चला था, अराष्ट्रीय-आक्रामक शक्तियों के प्रतिकार और प्रतिरोध की प्रवृत्तियाँ कुछ क्षीण-सी हो चली थी, जब पूरी दुनिया में धर्म और संस्कृति, उदारता और विश्व-बंधुत्व का गौरव-ध्वज फ़हराने वाले महान भारतवर्ष का पहली बार किसी क्रूर एवं बर्बर सुलतान से सीधे तौर पर पाला पड़ा था, जब दिल्ली की तख़्त पर बैठा एक मज़हबी सुलतान पूरे देश को एक ही रंग में रंगने की ज़िद्द और जुनून पाले बैठा था, जब कतिपय अपवादों को छोड़कर शेष भारत ने उस अन्याय-अत्याचार को ही अपना भाग्य मान स्वीकार करना प्रारंभ कर दिया था, जब साहस और संघर्ष की गौरवशाली सनातनी परंपरा का परित्याग कर समाज के अधिसंख्य जनों ने भीरूता और पलायन-वृत्ति का सुरक...........

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