बसपा में भी परिवारवाद :- आखिर इस सड़ांध का कारण क्या है?

1 week ago
desiCNN
धीरे-धीरे देश की सभी क्षेत्रीय पार्टियाँ, अब पारिवारिक प्रायवेट लिमिटेड कम्पनी" बनती जा रही हैं... सत्ता में रहते हुए जो मकान,, दुकान, जमीन, संपत्ति एकत्रित की जाती है, उसे संभालने के लिए परिवार का ही व्यक्ति भरोसेमंद लगता है... कुछ दिन पूर्व बहुजन समाज पार्टी की मुखिया मायावती ने विधिवत घोषणा कर दी कि उनका भाई आनंद और भतीजा आकाश पार्टी में नंबर दो और तीन के पद पर रहेंगे। कभी काशीराम और मायावती परिवारवाद के खुले विरोधी थे; फिर ब.स.पा. परिवार के दलदल में क्यों कूद पड़ी? इसका विश्लेषण करें, तो ध्यान में आएगा कि जैसे हर इन्सान को बुढ़ापे में कुछ रोग लगते हैं, ऐसा ही राजनीतिक दलों के साथ भी होता है। परिवारवाद ऐसा ही एक रोग है। भारतीय राजनीति में यह नयी बात नहीं है। असल में राजनीतिक दलों में भिन्नता विचारों के आधार पर होती है। किसी समय कांग्रेस आजादी के लिए संघर्ष करने वाली ...........

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