बहुसंख्यक हिन्दू उपेक्षित क्यों है? :- संविधान और धर्म के दायरे का विश्लेषण

8 months ago
प्रो.रामेश्वर मिश्र "पंकज"
जब भी हम हिंदू समाज और उसकी दशा पर चर्चा करते हैं, तो हम इंग्लैंड में हिंदुओं की दशा, अमेरिका में हिंदुओं की दशा, मुस्लिम राज्य में हिंदुओं की दशा पर चर्चा नहीं कर सकते। ठीक इसी प्रकार 1947 के बाद भारत में जो हो रहा है, उसका हिंदू समाज से सीधा रिश्ता नहीं है। न तो भारत में हिंदुओं का राज्य है, न भारत का कोई भी राजनीतिक दल हिंदू धर्म तथा हिंदू राज्य पद्धति पर श्रद्धा रखती है और न ही किसी भी राजनीतिक दल के घोषणापत्र में यह कहा गया है कि भारत का मुख्य समाज हिंदू समाज है और हम उसका भी हितचिंतन करेंगे। यह जानना इसलिए भी आवश्यक है कि आज विश्व में जितने भी समाज हैं, उनमें से एक भी समाज ऐसा नहीं है जो अगर बहुसंख्या में है तो वहां का राज्य उसके रिलीजियन या मजहब को अधिकृत संरक्षण नहीं देता हो।धर्म तो कहीं है ही नहीं। ऑक्सफोर्ड की जो नई डिक्शनरी आई है, उसमें रिलीजियन और धर्म दोनों श...........

For More Download the App