"भगवा आतंक" शब्द की अंत्येष्टि का समय

1 year ago
desiCNN
भोपाल देश के ह्रदय स्थल में स्थित है और प्रकृति ने आज भोपाल को समूचे देश के ह्रदय की आवाज बनने का अवसर प्रदान किया है. विचार करें तो लगता है कि – आज दिग्विजय सिंह हिंदूत्व परिवार के मतदाता रुपी वधु से वैसी ही भेष बदलकर भिक्षा मांग रहे हैं जैसी भिक्षा कभी श्रीराम और लक्ष्मण को मारीच के पीछे भेजकर रावण ने माँ सीता से मांगी थी. भेष ब्राह्मण का है अर्थात हिंदूत्व का और विचार व कर्म निस्संदेह “भगवा आतंकवाद” के हैं. वैचारिक धुंध या संक्रमण उत्पन्न करने के दिग्गी राजा के इस धुंध फैलाने के अभियान में निराकरण हेतु, मुझे स्वामी विवेकानंद का एक उद्धरण स्मरण आता है –“ब्रह्माण्ड की सारी शक्तियां पहले से हमारी हैं. वो हम ही हैं जो अपनी आँखों पर हाथ रख लेते हैं और फिर रोते हैं कि कितना अंधकार है!” हिंदूत्व के संदर्भ में विवेकानंद जी ने जब ये कहा होगा तब उन्हें यह कल्पना नहीं रही ...........

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