भाजपा को “हिन्दुत्व” और “राष्ट्रवाद” से दूर हटने और “सेकुलर” वायरस को गले लगाने की सजा BJP’s Defeat in 2009 Elections, Hindutva and Secularism

10 years ago
Super User
एक सज्जन हैं जो एक समय पर पक्के और ठोस कम्युनिस्ट थे, हिन्दुत्व और साम्प्रदायिकता को कोसने का जो फ़ैशन आज भी चलता है, उसी के ध्वजवाहक थे उन दिनों… आईआईटी मुम्बई के ग्रेजुएट बुद्धिजीवी। माकपा की छात्र इकाई, स्टूडेंट्स फ़ेडरेशन ऑफ़ इंडिया के सक्रिय कार्यकर्ता। जब ये साहब माकपा में थे तब उन्होंने मास्को का दौरा भी किया था और मुम्बई की लोकल ट्रेनों में “साम्प्रदायिकता” (ज़ाहिर है कि हिन्दू साम्प्रदायिकता) के खिलाफ़ सैकड़ों पोस्टर चिपकाये थे, ये पोस्टर जावेद आनन्द और तीस्ता सीतलवाड के साथ मिलकर इन्होंने संघ-विरोध और सेकुलर-समर्थन में लगाये थे। सस्पेंस बनाने की कोई तुक नहीं है, क्योंकि काफ़ी लोग इन सज्जन को जानते हैं, ये हैं “सुधीन्द्र कुलकर्णी”, जो 1998 में वाजपेयी के दफ़्तर (प्रधानमंत्री कार्यालय) में डायरेक्टर के पद पर रहे, 2004 में भाजपा के राष्ट्रीय सचिव, और 2005 से आडवाणी क...........

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