मिशनरी गेम :- सेवा के बहाने धर्मान्तरण, लूट और षड्यंत्र

6 days ago
desiCNN
१९ वीं सदी में दुनिया में विस्तार पाते यूरोपीय साम्राज्यवाद और पूंजीवाद की पृष्ठभूमि को स्पष्ट करते हुए अपनी पुस्तक ‘ग्लिम्पसेस ऑफ़ वर्ल्ड हिस्ट्री’ में जवाहरलाल नेहरु बताते है कि ये वो समय था जब कहा जाता था कि आगे बढ़ती सेना के झंडे का अनुसरण उसके देश का व्यापार करता था. और कई बार तो ऐसा भी होता था कि बाइबिल आगे-आगे चलती थी, और सेना उसके पीछे- पीछे. प्रेम और सत्य के नाम पर आगे बढ़ने वाली क्रिस्चियन मिशनरीज़ दरअसल साम्राज्यवादी शक्तियों के लिए आउटपोस्ट[चौकी] की तरह काम करती थी. और यदि उन को किसी इलाके में कोई नुकसान पहुंचा दे तो फिर तो उस के देश को उस इलाके को हड़पने का, उससे हर्जाना बसूलने का बहाने मिल जाता था.[ पृष्ठ- ४६३] इस बात को गुजरे लगभग १५० वर्ष हो चुकें हैं, और वक्त काफी बदल चुका है. पर जहां तक बात देश के अन्दर सक्रीय मिशनरीज़ की है, उन्होंने बार-बार साबित किया है क...........

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