मुफ्तखोरी योजनाएँ :- क्या ऐसे बन सकेगी 5 ट्रिलियन इकोनॉमी??

2 weeks ago
desiCNN
(लेखक :- डॉ अजय खेमरिया)जबाबदेह नागरिक समाज के अपरिहार्य तत्व को खत्म करने की समवेत सहमति बनाती चुनावी राजनीति एक खतरनाक संकेतक है।दिल्ली विधानसभा चुनाव में जिस तरह मुफ्तखोरी की उद्घोषणाए हो रही है वह भारत के संसदीय लोकतंत्र की परिपक्वता को प्रश्नचिंहित करता है।औपनिवेशिक शासन से मुक्ति के प्रस्ताव का विरोध करते हुए ब्रिटिश प्रधानमंत्री विंस्टन चर्चिल ने कहा था"धूर्त,बदमाश, एवं लुटेरे हाथों में सत्ता चली जायेगी।सभी भारतीय नेता सामर्थ्य में कमजोर और महत्वहीन व्यक्ति होंगे।वे जुवान से मीठे होंगे।सत्ता के लिए आपस में लड़ मरेंगे और भारत राजनीतिक तू- तू मैं- मैं में कहीं खो जाएगा।"चर्चिल इस पूर्वानुमान को पूरी तरह से सत्य तो नही कहा जा सकता लेकिन जिस तरह से भारत को सत्ता का टापू बना दिया गया है उसे समझते हुए उनके आंकलन को सिरे से खारिज भी नही किया जाना चाहिए।द...........

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