मृत्यु से दशाकर्म तक :- शरीर से आत्मा का प्रवास (श्राद्ध पक्ष विशेष)

6 months ago
पण्डित दिलीप कोरान्ने
मृत्यु एक अटल सत्य है. मृत्यु सभी को आनी है और इसे टाला नहीं जा सकता. सनातन धर्म में “पुनर्जन्म” की अवधारणा है. पुनर्जन्म के सम्बन्ध में कई बार, कई स्थानों पर जीवंत तथ्य एवं सबूत मिले हैं, जिसमें किसी बच्चे ने अपने पिछले जन्म की सभी प्रमुख घटनाओं को बाकायदा चिन्हित और लिपिबद्ध भी किया है. लोगों के मन में अक्सर यह प्रश्न उठता है कि मनुष्य के शरीर से आत्मा निकलने के पश्चात उसे अगला जन्म प्राप्त होने के बीच आत्मा का प्रवास कैसा होता है? क्या आत्मा तुरंत अगले शरीर में प्रवेश कर जाती है? अथवा भटकती रहती है? या सदैव अतृप्त रहती है? पुनर्जन्म कैसे मिलता है, और सदगति किसे कहते हैं? ऐसे ही कुछ प्रश्नों का संक्षेप में उत्तर देने का प्रयास इस लेख में किया गया है.यहाँ थोडा सा विषयांतर करना आवश्यक है... यह तो सर्वमान्य तथ्य है कि व्यक्ति को उसके वर्तमान जीवन में किए गए पाप-पुण्यो...........

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