"यस बैंक" अचानक ही "नो बैंक" क्यों बन गया?? जानिये...

6 months ago
desiCNN
निजी क्षेत्र के ‘यस बैंक’ का कंगाली की हालत में पहुंचना एवं इस सन्दर्भ में सरकार द्वारा उठाये गये कदम दोंनो ही स्थितियां प्रश्नों के घेरे में हैं। यह कैसा विरोधाभास है कि एक तरफ तो सरकार अपने नियन्त्रण में चलने वाली लाभप्रद कम्पनियों की पूंजी बेच कर रोकड़ा की उगाही कर रही है और दूसरी तरफ वित्तीय घपलों-घोटालों को अंजाम देकर घाटा दिखाने वाले निजी बैंकों एवं संस्थानों के लिए अपने ही वित्तीय संस्थानों के माध्यम से बचाव अभियान चला रही है, ये आर्थिक प्रयोग एवं नीतियां भारत की आर्थिक नीतियों को धुंधलाने के ही उपक्रम हैं। यस बैंक में अपनी मेहनत की जमा पूंजी के खतरे में होने की संभावनाओं ने ही असंख्य लोगों के न केवल अर्थ को बल्कि जीवन को ही खतरों में डाल दिया है। ये घटनाएं न केवल भारतीय बैंकिंग व्यवस्था पर बल्कि शासन व्यवस्था पर भी एक बदनुमा दाग है।आज यह स्वीकारते क...........

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