यूरोप में नदी को देवी या माता नहीं मानते... फिर भी स्वच्छ हैं

1 week ago
desiCNN
पिछले एक माह में हमने भारत में दो तरह की बातें देखीं। जैसे-जैसे गर्मी बढ़ी पानी के लिए भारी किल्लत का सामना करना पड़ा। कई जगहों से पानी के लिए मारपीट की खबरें भी आईं। दूसरी तरफ जब बारिश होने लगी तो बाढ़ के प्रकोप को हमने देखा। खेतों से लेकर सड़कें पानी से भरी नजर आईं।इससे पता चलता है कि वर्षा से प्राप्त पानी के मैनेजमेंट की हमने कोई खास व्यवस्था नहीं की। वरना तो न पानी की कमी के कारण हाहाकार हो, न बाढ़ से तबाही हो। हाल ही में स्विट्जरलैंड के हाइड्रॉलजिकल कमिशन की रिपोर्ट पढ़ रही थी। इसमें पानी की स्थिति के बारे में 1901 से लेकर इस सदी के आखिर और अगली सदी तक की बातें की गई हैं। इसमें कहा गया है कि क्लाइमेट चेंज एक भारी चुनौती है। स्विट्जरलैंड एक छोटा सा देश है। इसकी आबादी मात्र सत्तर लाख है। यहां अर्थव्यवस्था का बड़ा हिस्सा पर्यटन पर निर्भर है। यूरोप के अन्य देशों की त...........

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