राज्यों में भाजपा के छोटे सहयोगी भयभीत हैं... -- जानिए क्यों...

1 week ago
desiCNN
लेखक: नवीन जोशीचुनावी राजनीति के खेल अजब-गजब ही होते हैं। थोड़ी हार-जीत भी शेर को बिल्ली और बिल्ली को शेर बना देती है। महाराष्ट्र ताजा और सबसे अच्छा उदाहरण है। भाजपा बहुमत पा गई होती, तो शिवसेना चुपचाप उसकी सारी बातें मान लेती। वह पिछला प्रदर्शन भी दोहरा पाती, तो बात इतनी बिगड़ती नहीं। थोड़ी-बहुत तनातनी के बाद समझौता हो जाता। महाराष्ट्र में ही नहीं हरियाणा में भी भाजपा को उम्मीद से बहुत कम सीटें मिलीं। शिवसेना और उसके बीच इतनी रस्साकशी हुई कि रिश्ता ही टूट गया। हरियाणा में भी नई-नई बनी जननायक जनता पार्टी ने गठबंधन करने के लिए भाजपा से उपमुख्यमंत्री का पद झटक लिया। इस राज्य में उसकी जीती सीटों की संख्या पहले से काफी कम हो गई थीं, इसलिए उसे दुष्यंत चौटाला की शर्त माननी पड़ी। इसके बावजूद मंत्रिमंडल विस्तार कई दिन टला। हरियाणा और महाराष्ट्र के चुनाव नतीजों में भाजपा ...........

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