राफेल विमान सौदा :- फायदे और नुक्सान क्या-क्या हैं?

10 months ago
desiCNN
लेखक :- सुमंत विद्वांससन २००७। भारत में सोनिया जी की यूपीए सरकार थी। वायुसेना के मिग विमान बूढ़े हो चले थे। सरकार ने इनकी जगह लेने के लिए १२६ नए युद्धक विमान खरीदने की सहमति दे दी। प्रारंभिक प्रस्ताव यह था कि इन १२६ विमानों में से १८ विदेश से बने-बनाए आएँगे और शेष १०८ विमानों का निर्माण भारत की किसी कंपनी के साथ मिलकर किया जाएगा और संभावना यह थी ये काम भारत की सरकारी कंपनी हिंदुस्तान ऐरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) ही करेगी। इसके अलावा इन विमानों के रखरखाव, मरम्मत और सुधार के लिए आवश्यक सुविधाओं का इंतज़ाम भी किया जाना था।अब इसके लिए टेंडर निकाला गया और अप्रैल २००८ में दुनिया भर की छः कंपनियों ने टेंडर भरा, जिनमें जर्मनी, अमरीका, स्वीडन और रूस की कंपनियों के अलावा फ़्रांस की कंपनी डासों (Dassualt) भी थी। इन सब कंपनियों के पास अलग-अलग विशेषताओं वाले विभिन्न तरह के विमान थे। इसक...........

For More Download the App