वन्देमातरम और जन्मभूमि भारत के बारे में दारुल उलूम देवबंद का फ़तवा

2 months ago
desiCNN
प्रसिद्ध इस्लामिक शिक्षण संस्थान दारुल उलूम देवबंद द्वारा दिए गए हालिया फरमान को पढ़कर कई प्रश्‍न आज उठ खड़े हुए हैं। क्‍या देशभक्‍ति से ऊपर धर्म या पंथ भक्‍ति होनी चाहिए ? यह कैसा विरोधाभास है कि एक तरफ तो देशभक्‍ति के कसीदे गढ़ते हुए इस्‍लामिक स्‍कोलर्स यह समझाने का प्रयास करते हैं कि हमारे यहां भी वतन को माता के समान मानकर उसे सम्‍मान दिया जाता है और कई जगह ‘मादरे वतन’ का जिक्र हमारी पान्‍थिक पुस्‍तकों में हुआ है तो दूसरी ओर नजरा कुछ इस प्रकार का नकारात्‍मक प्रत्‍यक्ष नजर आ रहा है। देश में जब कहीं भी सर्वधर्म-सर्वपंथ सद्भाव आधारित राष्ट्रीय सम्मेलन में भाग लेने इस्‍लामिक विद्वान पहुँचते हैं तो प्राय: यही सुनाई देता है, जैसा कि जमायत-ए-उलेमा-ए हिन्द के अध्यक्ष अरशद मदनी अक्‍सर कहते हैं कि हिंदुस्तान जिंदाबाद, मादरे वतन और भारत माता की जय में कोई अंतर नही...........

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