वैदिक धर्म एवं संस्कृति के सशक्त वाहक पंडित चमूपति

2 weeks ago
Suresh Chiplunkar
वेद संसार की सबसे पुरानी पुस्तक है। वेद ही संसार के अतीत, वर्तमान एवं भविष्य के धर्म विषयक ज्ञान के आदि स्रोत भी हैं। यह बात अनेक तर्क एवं युक्तियों से सिद्ध की जा सकती है। वेदों का इतर मत-पंथ के ग्रन्थों से तुलनात्मक अध्ययन भी इस बात की पुष्टि करता है। वेदों का ज्ञान मनुष्यों से आविर्भूत न होकर सृष्टि के रचयिता एवं पालक परमेश्वर से आविर्भूत है जिसका उद्देश्य मनुष्य मात्र का कल्याण एवं उसे धर्म, अर्थ, काम एवं मोक्ष प्रदान कराना है। वैदिक धर्म एवं संस्कृति किसी एक जाति, मत व समुदाय की बपौती न होकर मनुष्यमात्र की साझा धर्म एवं संस्कृति है। वेदां का अध्ययन एवं वैदिक सिद्धान्तों का आचरण मनुष्य के ज्ञान को शून्य से शिखर पर ले जाता है। अतः सभी मनुष्यों को वेदाध्ययन एवं वैदिक धर्म का आचरण स्वार्थ से ऊपर उठकर ज्ञान व विवेकपूर्वक करना चाहिये। वेद एवं मत-मतान्तरों का अ...........

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