शिक्षा की दशा और दिशा बदल सकते हैं खेल...

1 week ago
desiCNN
किसी राष्ट्र का निर्माण अचानक नहीं होता है। राष्ट्र निर्माण में शारीरिक, मानसिक और बौद्धिक योगदान की आवश्यकता होती है। विश्वविद्यालयों का काम विद्यार्थियों के व्यक्तित्व का निर्माण करना होता है। यह तब होगा, जब उनका शारीरिक, मानसिक, बौद्धिक सभी क्षेत्रों में विकास हो।इसी आधार पर सहनशीलता, सद्भाव, निष्पक्षता और अनुशासन के गुण वाले लोग तैयार होते हैं। ये ना केवल अपना, अपने परिवार, बल्कि अपने देश के निर्माण के साथ-साथ समूची सृष्टि में अपना योगदान सुनिश्चित करते हैं। जैसे ओलंपिक में अलग-अलग राष्ट्र शामिल होते हैं, वैसे ही विश्वविद्यालय में देश के अलग-अलग हिस्सों से आए लोग मिलकर राष्ट्र का प्रतिनिधित्व करते हैं।राष्ट्र का प्रतिनिधित्व करने वाले लोग तैयार करने के लिए जरूरी है कि शिक्षा उत्पादक, व्यावहारिक और क्रियान्वित करने वाली हो। इसी दिशा में विश्वविद्य...........

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