शिक्षा नीति पर विमर्श... और कुछ बुनियादी सुधार

4 months ago
desiCNN
जब मैं छोटा था, तब मेरे चचेरे भाई ने मुझसे एक सवाल पूछा- ‘तुम खाली पेट कितनी रोटियां खा सकते हो?’ मैंने बडे़ उत्साह से कहा, ‘सात’। भाई ने जोरदार ठहाका लगाया और कहा, ‘कोई भी आदमी खाली पेट एक रोटी से ज्यादा नहीं खा सकता, क्योंकि पहली रोटी खाने के बाद पेट खाली कहां रहता है?’ सरकारी स्कूलों के शौचालयों के बारे में मैं इससे मिलता-जुलता सवाल पूछ सकता हूं- किसी सरकारी स्कूल में कितने बच्चे शौचालय का इस्तेमाल कर सकते हैं? इसका भी जवाब वही होगा- अधिक से अधिक एक। क्योंकि इसके बाद वह शौचालय इस्तेमाल लायक बचेगा ही नहीं। क्योंकि ऐसे ज्यादातर शौचालयों में पानी होता ही नहीं। कई बार तो मैंने देखा है कि जिला शिक्षा प्रशिक्षण संस्थान (डाइट) में प्रिंसिपल के कार्यालय का शौचालय भी इस्तेमाल योग्य नहीं होता, क्योंकि यूरीनल की पाइप टूटी होती है और शौचालय में पानी भी नहीं होता। बात सिर्फ श...........

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