संघ परिवार एवं विचारधारा के संकट :- अनुज अग्रवाल

10 months ago
अनुज अग्रवाल
मुझे वो समय याद है जब जनसंघ व भाजपा का मतलब  होता था समर्पित  नेताओं व कार्यकर्ताओं की टोली। विचारधारा व आदर्शों के प्रति समर्पण का ऐसा भाव शायद ही किसी ओर में देखने को मिलता था। हाँ वामपंथी कुछ अपवाद जरूर थे। पूरा संघ परिवार एक सुर व निष्ठा से संघर्ष, आंदोलन व कार्य करता था और लक्ष्य स्पष्ट था भारत को विश्व गुरु बनाना व पुराने वैभव पर पुनः स्थापित करना। सन 77 में जनता पार्टी की सरकार में भागीदारी और वीपी सिंह की सरकार को बाहर से समर्थन के बीच जब 23 दलों की मिलीजुली सरकार अटल जी के नेतृत्व में बनी तब संघ परिवार को सत्ता पाने व बनाए रखने के सारे आसन समझ आ गए और कांग्रेस की दशकों तक लगातार देश पर राज करने के फार्मूले भी। ऐसे में आदर्श तिरोहित हो गए और सत्ता की चमक यानि "शाइनिंग इंडिया" के नारे के बीच घाघ सेकुलर खेमे की गिरोहबंदी में बाजपेयी ,भाजपा व संघ परिवार सन 2004 में सत्...........

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