समान नागरिक संहिता :- बदले हुए भारत और समय की माँग

1 week ago
desiCNN
संसार के किसी भी देश में पन्थ, मजहब के आधार पर पृथक- पृथक कानून नहीं होते, बल्कि सभी नागरिकों के लिए एक समान व्यवस्था व कानून होते हैं। सिर्फ भारत ही एकमात्र ऐसा देश है, जिसमें अल्पसंख्यक वर्गों के लिए वैयक्तिक अर्थात पर्सनल कानून बने हुए हैं, जबकि देश का संविधान अनुच्छेद 15 के अनुसार धर्म, लिंग, क्षेत्र व भाषा आदि के आधार पर समाज में भेदभाव नहीं करता और सभी के लिए एक समान व्यवस्था व कानून सुनिश्चित करने की बात करता है। लेकिन बाद में संशोधनों के माध्यम से संविधान के अनुच्छेद 26 से 31 में कुछ ऐसे प्रावधान कर दिए गए हैं जिससे बहुसंख्यक हिन्दुओं के सांस्कृतिक,शैक्षिक व धार्मिक संस्थानों एवं ट्रस्टों को विवाद की स्थिति में शासन द्वारा अधिग्रहण किया जाता रहा है, और अल्पसंख्यकों के संस्थानों आदि में विवाद होने पर भी शासन कोई हस्तक्षेप नहीं करता। बहुसंख्यक समाज के विद्व...........

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