सिंधुघाटी सभ्यता की लिपि को नहीं पढ़ा जाना, एक गंभीर साज़िश...

1 week ago
desiCNN
जेनेटिक साइंस ‘गुणसूत्र विज्ञान’ के विविध अनुसंधानों से अब जब यह सिद्ध हो चुका है कि सिन्धु घाटी सभ्यता वास्तव में वैदिक आर्यों की ही एक पुरानी सभ्यता थी और भारत भूमि ही आर्यों की उद्गम भूमि रही है। तब उसके अवशेषों में उपलब्ध लिखित सामग्रियों की लिपि को अब तक नहीं पढ़ा जाना एक गहरे साजिश का परिणाम प्रतीत हो रहा है। इजिप्ट, चीनी, फोनेशियाई, आर्मेनिक तथा सुमेरियाई और मेसोपोटामियाई सभ्यताओं की लिपियां जब पढ़ ली गई हैं, तब सिन्धु सभ्यता के अवशेषों को आखिर अब तक क्यों नहीं पढ़ा जा सका है? जबकि, जेनेटिक साइंस एवं कम्प्यूटर टेक्नोलॉजी से प्राचीन लिपियों का पढ़ा जाना पहले की तुलना में अब ज्यादा आसान हो गया है। भारत के इतिहास को सही दिशा में सुव्यवस्थित करने के निमित्त इसका पढ़ा जाना आवश्यक है। पहले इस सभ्यता का विस्तार पंजाब, सिंध, गुजरात एवं राजस्थान तक बताया जाता ...........

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