फ़्रांस घटना :- अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और इस्लामिक दुनिया पर बहस शुरू

3 weeks ago
विनोद कुमार सर्वोदय
पेरिस में 16 अक्टूबर को एक शिक्षक की नृशस हत्या करके एक बार फिर अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर प्रहार करके भड़के हुए इस्लामिक आतंकवाद ने सभ्य समाज को भयभीत करने का दुःसाहस किया है। विस्तार से समझने के लिए प्राचीन इतिहास को छोड़ते हुए 21 वीं सदी के आरम्भ से अब तक की कुछ घटनाओं पर विचार करना उचित रहेगा। स्मरण करना होगा कि डेनमार्क के एक समाचार पत्र “जिलैंड्स पोस्टेन” में सितंबर 2005 में व उनके बाद 2006 में कुछ अन्य यूरोपियन व अमेरिकन पत्रिकाओं में प्रकाशित इस्लाम के पैगम्बर मोहम्मद से सम्बंधित चित्रों के विरोध में भारत सहित अनेक देशों में महीनों हिंसक व अहिंसक प्रदर्शनों के पीछे कौन सी सोच थी? डेनमार्क के इस कार्टूनिस्ट कर्ट वेस्टरगार्ड ने ऐसी भयावह स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा था कि “कार्टूनों से मुसलमान नहीं बल्कि आतंकवाद भड़का है”। उनके सिर पर कुछ भारतीयों सहि...........

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