Me Too के बारे में मनु और चाणक्य के विधान

6 months ago
रवि शंकर
आज सोशल मीडिया से लेकर इलेक्ट्रानिक मीडिया तक मी टू की चर्चा खूब हो रही है। मी टू यानी मैं भी। ये प्रतीक शब्द हैं जिनके द्वारा यौन प्रताड़ना से गुजरी स्त्रियां आज अपनी आपबीती सुना रही हैं। इस आपबीती के खुलासे में बड़े-बड़े प्रसिद्ध नाम आ रहे हैं। फिल्म जगत से लेकर साहित्य जगत और राजनीति तक के अनेक लोगों पर आरोप लग चुके हैं। हालांकि इस मी टू अभियान का प्रारंभ हॉलीवुड से हुआ था, परंतु भारत में भी कई स्त्रियों ने अपनी व्यथा-कथा कहना प्रारंभ कर दिया है। इन आरोपों में कितना सच है और कितना दुष्प्रचार, यह तो न्यायालय और समय ही तय करेगा, परंतु यह एक सच्चाई है कि कार्यस्थलों तथा सार्वजनिक जीवन में यौन उत्पीड़न की घटनाएं बड़े परिमाण में घटती हैं। यदि हम कुछेक राजनीतिक कारणों से लग रहे आरोपों को छोड़ दें तो भी इस बात की उपेक्षा नहीं की जा सकती कि पिछले कुछ दशकों में ऐसी घटना...........

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